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Monday, 6 December 2021

मैं अस्पताल का मुर्दाघर हूँ !

अगर मैं अस्पताल का एक बिस्तर होता , 
और रोज़ देखता सैकड़ों आँखें , 
अपनों को दुःख में देख कर नम होती आँखें , 
कमरे के बाहर छुप कर रोती आँखें , 
दो जोड़ी नज़रों से , 
खुद को चुरा कर आँसू पोंछती आँखें , 
किसी अपने के गुज़र जाने पर पत्थर होती आँखें । 


मैं सोचता ज़रूर , 
कि निर्जीव होना बेहतर है , 
कुछ ना महसूस करना बेहतर है । 

बेहतर है एक ही जगह पड़े रहना , 
बेहतर है बदहवास लोगों का , 
होश आने तक मुझसे लिपटे रहना । 

और फिर ज़िंदगी या मौत किसी का दामन ढूंढ कर , 
मुझसे दूर चले जाना । 

बेहतर मेरा एक ही कमरे में पड़े रहना भी है , 
मेरी ना भटकने की चाह सबूत है इस बात का , 
कि निर्जीव वस्तुओं को सुकून की तलाश नहीं होती । 

वो कभी बोर नहीं होते , 
उन्हें किसी से आस नहीं होती । 

मगर मैं वो बिस्तर नहीं हूँ , 
मैं अस्पताल का मुर्दाघर हूँ , 
जिसने देखा है उन तमाम जाने वालों को , 
पीछे छूट जाने वालों के लिये आँसू बहाते , 
शांत चेहरे से हर भाव छुपाते , 
उस बिस्तर को याद करते , 
सुकून की तलाश में भटकते ।


मैंने देखी है उनकी जीवित आत्मा , 
उनकी ज़िंदगी को वापस पा लेने की चाह , 
ढूँढ़ते हुए उनका अस्तित्व , 
बीते वक़्त के लिए उनकी निकली हुई आह , 
मैंने देखा है मृत्यु का सत्य , 
और जीवन का अर्ध सत्य , 
मैंने देखा है उन निर्जीवों को , 
सजीवों से ज़्यादा महसूस करते ।
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Writing ✍️ By : Saurav Meena ( Nicki - Hazel )


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Thursday, 11 November 2021

मौत का भी कारण होता है । अकेलेपन का कोई कारण नहीं होता ।

कल रात फिर मैं उसके घर में घुस गया । उसे मेरा ऐसे चले आना बिल्कुल पसंद नहीं था । फिर किसी को क्यों ही पसंद आयेगा कि कभी भी बिना बताये कोई चला आये और आकर भीतर उथल - पुथल मचा दे । मैंने फिर से वही किया । हर कमरे में जा कर जासूसों की भाँति सब कुछ जाँचा परखा । मुझे कहीं भी किसी के होने का कोई निशान नहीं मिल रहा था । मैं अपनी नाकामी से परेशान हो कर सब कुछ उलट - पलट कर देखने लगा । कुछ तोड़ कर देखा , कुछ चीर कर । हर जगह मुझे बस मायूसी हाथ लगी । हताशा से भरा हुआ मैं , ये तय कर चुका था कि अब मुझे यहाँ नहीं आना । 

मुझे ये पता था कि मेरा मन खाली है । आज मुझे समझ आया कि अब मेरा दिमाग भी खाली हो चुका है । अब यहाँ भी कोई नहीं रहता । ना कोई आता - जाता है । मैं कितना भी ढूँढ लूँ , मुझे अब किसी का अस्तित्व नहीं मिलेगा । यहाँ अब दुःख भी नहीं रहता । ये अच्छा है या बुरा ? बुरा ही होगा । दुःख के रहने से कम से कम किसी का होना तो होता है । फिर दुःख अकेला भी तो नहीं आता , साथ में कुछ लोग या कारण ले आता है । अकेलापन तो कारण भी नहीं ला पाता अपने साथ । 

अकेले रहना कोई आदत होती है क्या ? अच्छी या बुरी ? मुझे तो लगता है ये कोई बीमारी होती है । पर बीमारी का भी तो कारण होता है ना । जब मैं पहली बार मरा था , तब मुझे मालूम था कि मेरा दिल बीमार है और उसी ने मुझे धोखा दिया था । दूसरी बार , मुझे मेरे फेफड़ों ने मारा था । उसके बाद जब भी किसी बीमारी से मरा , तो कारण मालूम था । बिना बीमारी के भी मरा , तब भी कारण मालूम था ।

मौत का भी कारण होता है । अकेलेपन का कोई कारण नहीं होता । अकेलापन बस होता है । उसका होना ही इस बात की गवाही देता है कि इस दुनिया में सब कुछ बिना कारण के ही है । आप भी । 

अब मैं अपने दिमाग से निकल कर दुनिया में वापस आ चुका हूँ । अब कोई मुझसे बस ये ना पूछे कि आपके लिये किसी बात का कोई मायना क्यों नहीं है । मैं शून्यवाद में जीते हुए भी कारण तलाशने चला जाता हूँ । वो शून्यवाद , जिसके साथ मेरा रिश्ता सार्वजनिक है । और फिर वो औरतें जिनके साथ मेरे रिश्ते को हम दोनों के अलावा कोई नहीं जानता , वो मुझसे उस रिश्ते में वफ़ा की उम्मीद रखती हैं । मेरे किसी से वफ़ादार ना होने का कारण भी मुझे नहीं पता । मुझे बस ये पता है कि मैं इसका कारण जानने को दुबारा अपने दिमाग के घर में पाँव नहीं रखूँगा ।

 ' अकेलापन वफ़ादारी नहीं होने से आता है । एक दिन मेरा दिमाग मुझे ये खुद बताने चल कर मेरे घर आयेगा । तब तक मैं यूँ ही अकेलेपन में अपने आप को सही मान कर ऐसे ही बातें बनाता रहूँगा ।

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Writing ✍️ By : Saurav Meena ( Nicki - Hazel )


Wednesday, 13 October 2021

काठ का दरवाज़ा 🚪

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इसी दरवाज़े से एक दिन उसको आना था,⁣

मैं टकटकी लगाये देखता रहा,⁣

इंतज़ार आसान रहा,⁣

मैं मुश्किल होता गया,⁣

चौखट को छूने वाली हवा,⁣

अपनी आहट यहाँ छोड़ कर चली गयी,⁣

दुबारा कभी ना आने को,⁣

गुज़रते वक़्त के साथ,⁣

ये दरवाज़ा मेरे अंदर के दीमक को खाने लगा,⁣

मेरी भावनाओं ने छोड़ दिया,⁣

दरवाज़े की तरफ देखना,⁣

मगर मैं निरंतर इस दरवाज़े को देखता रहा,⁣

एक दिन, मैं भी काठ का दरवाजा हो गया,⁣

उसी काठ के दरवाजे से,⁣

एक दिन मौत आयी,⁣

मेरा दरवाज़ा हो जाना,⁣

मेरी नियति थी,⁣

उसका मेरी मौत बन जाना,⁣

उसकी नियति थी,⁣

नियति की नियति यही है,⁣

वो कभी दरवाज़े से नहीं आती,⁣

दरवाज़े की नियति है,⁣

कि उससे कुछ नहीं आता,⁣

उससे बस टूटी हुई उम्मीद,⁣

बाहर जाती है। ⁣

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Writing ✍️ By : Saurav Meena ( Nicki - Hazel )

Saturday, 9 October 2021

आज गाड़ी तेरा भाई चलायेगा

मैं बरसों तक खुद पर तरस खाता रहा । मैं सोचता था मेरी ज़िंदगी में बहुत दुःख है । मेरा इस्तेमाल हर शख़्स अपने हिसाब से करता था । जब जी हुआ , पास आये , जब जी भर गया , चले गए । मैं सोचता था कि मेरा अस्तित्व क्या केवल इतना है कि मैं लोगों को उनके दुःख दूर करने के लिए याद रहता हूँ । 

फिर मैंने नज़र घुमाई और पाया कि मैं लोगों को उनके खुशी में भी याद आता हूँ । वो अपने जश्न में मुझे शामिल करना चाहते हैं । कुछ लोग मुझे बहाने से भी अपने जीवन में शामिल करते रहते हैं । उन्हें कोई वजह नहीं चाहिए होती । कुछ लोगों की ज़िंदगी में मैं लत की तरह भी बस जाता हूँ और फिर उनसे मुझसे दूर नहीं रहा जाता । 

ये सब देखते - देखते मैंने महसूस किया कि मैं जब भी किसी के सामने खुलता हूँ , तो मैं बहुत ज़्यादा देर उनके साथ रह नहीं पाता । मेरे वजूद का हर हिस्सा हर शख़्स संभाल नहीं पाता , और सब मुझे थोड़ा थोड़ा अपनी जरूरत के हिसाब से अपने अंदर ले कर चले जाते हैं । मैं किसी के अंदर पूरा नहीं समा पाता । कई बार मेरे अंदर की ख़लिश मेरे बाहर मौजूद इंसान को उसके अपने अंदर की ख़लिश से मिलवा देती है । शायद इसलिए ये खुद से भागते हुए लोग , मुझे ज़्यादा देर झेल नहीं पाते । 

मैं कौन हूँ ? नहीं , मैं कोई लेखक नहीं हूँ जो ये बातें कह रहा है । मैं लेखक के अंदर जो शराब गई है , उसकी बोतल हूँ । मेरे वजूद का इतना सच , तुम्हारे वजूद का भी सच है ।

तुम सब सिर्फ़ बियर नहीं , हर शराब की बोतल हो ।

तुम्हारा सच भी इतना है कि तुम्हें लोग अपने दुःख , सुख , मर्ज़ी आदत के हिसाब से या कई बार यूँ ही बेवजह अपने पास ले आते हैं । तुम सोचते हो इसने बुरा किया , उसने अच्छा किया , उसने मुझे छोड़ दिया , उसने मेरा साथ दिया । जो तुम नहीं समझना चाहते वो ये है कि सामने वाला हमेशा शराब की पूरी बोतल नहीं ख़त्म कर सकता । सब की अपनी - अपनी क्षमता होती है । कई लोगों को बहुत सारी शराब मिला कर पीने की आदत भी होती है । कई लोग शराब पी कर उल्टियाँ करते भी पाए जाते हैं , और कई निश्चिन्त हो कर चुपचाप सो जाते हैं । इनमें से कुछ भी करने वाला इंसान सही है या गलत ये आप खुद तय कर लीजिए | 

मेरे अंदर आखिरी घूंट बाकी है जो ख़त्म होते ही मेरा वजूद मिट जाएगा । चूंकि आज मैं एक लेखक के अंदर खाली हो रहा था तो मैंने सोचा कि जाने के पहले अपना मन कह दूं । इसीलिए मैंने लेखक को भी ये कहा है कि  " आज गाड़ी तेरा भाई चलायेगा । "


Writing ✍️ By : Saurav Meena ( Nicki - Hazel )

Thursday, 30 September 2021

हम कौन लोग हैं ..?

हम कौन लोग हैं?
 ⁣
मक़बरे हैं क्या?⁣
या मक़बरे बनाने वाले हैं? ⁣

हम कौन लोग हैं? ⁣

जो मारे जाते हैं?⁣
या जो मार देते हैं?⁣

हम कौन लोग हैं? ⁣

जिन पर इल्ज़ाम आता है?⁣
या जो इल्ज़ाम लगाते हैं?⁣

हम कौन लोग हैं? ⁣

⁣हम वो लोग हैं,⁣
जिनमें ये दोनों लोग रहा करते हैं,⁣

हम वो लोग हैं,⁣
जो दूसरों को सब कहा करते हैं,⁣

हम वो लोग हैं,⁣
जो दूसरों से उल्टे बहा करते हैं,⁣

हम वो लोग हैं,⁣
जो ज़ुल्म कर के सहा करते हैं,⁣

हम बेहतर लोग हो सकते थे,
⁣मगर हमने चुना बदतर होना,⁣
हमने चुना सब को बदतर कह कर,⁣
खुद को बेहतर कह जाना,⁣

हम लोग भी हो सकते थे,⁣
मगर हम लोग हैं क्या?⁣
या केवल विडम्बनायें हैं?⁣

हम लोग नहीं भी हो सकते थे,⁣
मगर हम लोग तो हैं ना,⁣
या केवल महत्वाकांक्षायें हैं?⁣

हम क्या हैं फिर?⁣
हम विडंबनाओं और,⁣
महत्वकांक्षाओं के,⁣ बनाये हुए मक़बरे हैं,⁣
जिनपे इल्ज़ाम है कि,⁣ उन्हें मार दिया जाता है। ⁣




Writing ✍️ By : Saurav Meena ( Nicki - Hazel )


Wednesday, 22 September 2021

आज कल का वहम

वो कल भी थी 
वो आज भी है 

मेरे बदलते स्वभाव में 
बदलता मिज़ाज भी है 

वो अच्छे दिन में भी थी 
वो आज मेरे बुरे में भी है 

मेरे पुरे में भी थी कुछ 
आज मेरे अधूरे में भी है 

मेरे गिरने पर भी वो थी 
मुझे सँभालने में भी उसका हाथ था 

मुझे साथ मांगने नहीं आता 
मगर बिन मांगे भी उसका साथ था

मेरी ज़िंदगी का ये सब से बड़ा वहम था .💔




Writing ✍️ By : Saurav Meena ( Nicki - Hazel )


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Sunday, 12 September 2021

उनका ही इंतज़ार

जीने के नाम पर हम रोज मरते है 
वो आए या न आए एक उनका ही इंतेजार करते है ,
 
मोहब्बत है उनसे और उनसे ही करेंगे , 
इस बात का इकरार ख़ामोशी से हर बार करते है 

चुपके से उनके नाम की दुवाएं हर रोज मांगते है , 
एक उनके ही दीदार को हम दिन रात तरसते है 

उनकी खुशी , तरक्की , और सलामती मांगते है , 
एक उनके ही याद से हम सजते सवरते है 

जीने के नाम पर हम रोज मरते है 
वो आए या न आए हम उनका ही इंतेजार करते है ,



Writing ✍️ By : Saurav Meena ( Nicki - Hazel )


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"You Don't Lie To The Doctor. If You Do , You Die."

She asked me, "What has been your biggest fear throughout your life?" I sat there. Quietly. Normally, your silence hits others, bu...