हम कौन लोग हैं?
मक़बरे हैं क्या?
या मक़बरे बनाने वाले हैं?
हम कौन लोग हैं?
जो मारे जाते हैं?
या जो मार देते हैं?
हम कौन लोग हैं?
जिन पर इल्ज़ाम आता है?
या जो इल्ज़ाम लगाते हैं?
हम कौन लोग हैं?
हम वो लोग हैं,
जिनमें ये दोनों लोग रहा करते हैं,
हम वो लोग हैं,
जो दूसरों को सब कहा करते हैं,
हम वो लोग हैं,
जो दूसरों से उल्टे बहा करते हैं,
हम वो लोग हैं,
जो ज़ुल्म कर के सहा करते हैं,
हम बेहतर लोग हो सकते थे,
मगर हमने चुना बदतर होना,
हमने चुना सब को बदतर कह कर,
खुद को बेहतर कह जाना,
हम लोग भी हो सकते थे,
मगर हम लोग हैं क्या?
या केवल विडम्बनायें हैं?
हम लोग नहीं भी हो सकते थे,
मगर हम लोग तो हैं ना,
या केवल महत्वाकांक्षायें हैं?
हम क्या हैं फिर?
हम विडंबनाओं और,
महत्वकांक्षाओं के, बनाये हुए मक़बरे हैं,
जिनपे इल्ज़ाम है कि, उन्हें मार दिया जाता है।
Writing ✍️ By : Saurav Meena ( Nicki - Hazel )