Wednesday, 13 October 2021

काठ का दरवाज़ा 🚪

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इसी दरवाज़े से एक दिन उसको आना था,⁣

मैं टकटकी लगाये देखता रहा,⁣

इंतज़ार आसान रहा,⁣

मैं मुश्किल होता गया,⁣

चौखट को छूने वाली हवा,⁣

अपनी आहट यहाँ छोड़ कर चली गयी,⁣

दुबारा कभी ना आने को,⁣

गुज़रते वक़्त के साथ,⁣

ये दरवाज़ा मेरे अंदर के दीमक को खाने लगा,⁣

मेरी भावनाओं ने छोड़ दिया,⁣

दरवाज़े की तरफ देखना,⁣

मगर मैं निरंतर इस दरवाज़े को देखता रहा,⁣

एक दिन, मैं भी काठ का दरवाजा हो गया,⁣

उसी काठ के दरवाजे से,⁣

एक दिन मौत आयी,⁣

मेरा दरवाज़ा हो जाना,⁣

मेरी नियति थी,⁣

उसका मेरी मौत बन जाना,⁣

उसकी नियति थी,⁣

नियति की नियति यही है,⁣

वो कभी दरवाज़े से नहीं आती,⁣

दरवाज़े की नियति है,⁣

कि उससे कुछ नहीं आता,⁣

उससे बस टूटी हुई उम्मीद,⁣

बाहर जाती है। ⁣

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Writing ✍️ By : Saurav Meena ( Nicki - Hazel )

Saturday, 9 October 2021

आज गाड़ी तेरा भाई चलायेगा

मैं बरसों तक खुद पर तरस खाता रहा । मैं सोचता था मेरी ज़िंदगी में बहुत दुःख है । मेरा इस्तेमाल हर शख़्स अपने हिसाब से करता था । जब जी हुआ , पास आये , जब जी भर गया , चले गए । मैं सोचता था कि मेरा अस्तित्व क्या केवल इतना है कि मैं लोगों को उनके दुःख दूर करने के लिए याद रहता हूँ । 

फिर मैंने नज़र घुमाई और पाया कि मैं लोगों को उनके खुशी में भी याद आता हूँ । वो अपने जश्न में मुझे शामिल करना चाहते हैं । कुछ लोग मुझे बहाने से भी अपने जीवन में शामिल करते रहते हैं । उन्हें कोई वजह नहीं चाहिए होती । कुछ लोगों की ज़िंदगी में मैं लत की तरह भी बस जाता हूँ और फिर उनसे मुझसे दूर नहीं रहा जाता । 

ये सब देखते - देखते मैंने महसूस किया कि मैं जब भी किसी के सामने खुलता हूँ , तो मैं बहुत ज़्यादा देर उनके साथ रह नहीं पाता । मेरे वजूद का हर हिस्सा हर शख़्स संभाल नहीं पाता , और सब मुझे थोड़ा थोड़ा अपनी जरूरत के हिसाब से अपने अंदर ले कर चले जाते हैं । मैं किसी के अंदर पूरा नहीं समा पाता । कई बार मेरे अंदर की ख़लिश मेरे बाहर मौजूद इंसान को उसके अपने अंदर की ख़लिश से मिलवा देती है । शायद इसलिए ये खुद से भागते हुए लोग , मुझे ज़्यादा देर झेल नहीं पाते । 

मैं कौन हूँ ? नहीं , मैं कोई लेखक नहीं हूँ जो ये बातें कह रहा है । मैं लेखक के अंदर जो शराब गई है , उसकी बोतल हूँ । मेरे वजूद का इतना सच , तुम्हारे वजूद का भी सच है ।

तुम सब सिर्फ़ बियर नहीं , हर शराब की बोतल हो ।

तुम्हारा सच भी इतना है कि तुम्हें लोग अपने दुःख , सुख , मर्ज़ी आदत के हिसाब से या कई बार यूँ ही बेवजह अपने पास ले आते हैं । तुम सोचते हो इसने बुरा किया , उसने अच्छा किया , उसने मुझे छोड़ दिया , उसने मेरा साथ दिया । जो तुम नहीं समझना चाहते वो ये है कि सामने वाला हमेशा शराब की पूरी बोतल नहीं ख़त्म कर सकता । सब की अपनी - अपनी क्षमता होती है । कई लोगों को बहुत सारी शराब मिला कर पीने की आदत भी होती है । कई लोग शराब पी कर उल्टियाँ करते भी पाए जाते हैं , और कई निश्चिन्त हो कर चुपचाप सो जाते हैं । इनमें से कुछ भी करने वाला इंसान सही है या गलत ये आप खुद तय कर लीजिए | 

मेरे अंदर आखिरी घूंट बाकी है जो ख़त्म होते ही मेरा वजूद मिट जाएगा । चूंकि आज मैं एक लेखक के अंदर खाली हो रहा था तो मैंने सोचा कि जाने के पहले अपना मन कह दूं । इसीलिए मैंने लेखक को भी ये कहा है कि  " आज गाड़ी तेरा भाई चलायेगा । "


Writing ✍️ By : Saurav Meena ( Nicki - Hazel )

"You Don't Lie To The Doctor. If You Do , You Die."

She asked me, "What has been your biggest fear throughout your life?" I sat there. Quietly. Normally, your silence hits others, bu...