Wednesday, 13 October 2021

काठ का दरवाज़ा 🚪

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इसी दरवाज़े से एक दिन उसको आना था,⁣

मैं टकटकी लगाये देखता रहा,⁣

इंतज़ार आसान रहा,⁣

मैं मुश्किल होता गया,⁣

चौखट को छूने वाली हवा,⁣

अपनी आहट यहाँ छोड़ कर चली गयी,⁣

दुबारा कभी ना आने को,⁣

गुज़रते वक़्त के साथ,⁣

ये दरवाज़ा मेरे अंदर के दीमक को खाने लगा,⁣

मेरी भावनाओं ने छोड़ दिया,⁣

दरवाज़े की तरफ देखना,⁣

मगर मैं निरंतर इस दरवाज़े को देखता रहा,⁣

एक दिन, मैं भी काठ का दरवाजा हो गया,⁣

उसी काठ के दरवाजे से,⁣

एक दिन मौत आयी,⁣

मेरा दरवाज़ा हो जाना,⁣

मेरी नियति थी,⁣

उसका मेरी मौत बन जाना,⁣

उसकी नियति थी,⁣

नियति की नियति यही है,⁣

वो कभी दरवाज़े से नहीं आती,⁣

दरवाज़े की नियति है,⁣

कि उससे कुछ नहीं आता,⁣

उससे बस टूटी हुई उम्मीद,⁣

बाहर जाती है। ⁣

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Writing ✍️ By : Saurav Meena ( Nicki - Hazel )

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