कल रात फिर मैं उसके घर में घुस गया । उसे मेरा ऐसे चले आना बिल्कुल पसंद नहीं था । फिर किसी को क्यों ही पसंद आयेगा कि कभी भी बिना बताये कोई चला आये और आकर भीतर उथल - पुथल मचा दे । मैंने फिर से वही किया । हर कमरे में जा कर जासूसों की भाँति सब कुछ जाँचा परखा । मुझे कहीं भी किसी के होने का कोई निशान नहीं मिल रहा था । मैं अपनी नाकामी से परेशान हो कर सब कुछ उलट - पलट कर देखने लगा । कुछ तोड़ कर देखा , कुछ चीर कर । हर जगह मुझे बस मायूसी हाथ लगी । हताशा से भरा हुआ मैं , ये तय कर चुका था कि अब मुझे यहाँ नहीं आना ।
मुझे ये पता था कि मेरा मन खाली है । आज मुझे समझ आया कि अब मेरा दिमाग भी खाली हो चुका है । अब यहाँ भी कोई नहीं रहता । ना कोई आता - जाता है । मैं कितना भी ढूँढ लूँ , मुझे अब किसी का अस्तित्व नहीं मिलेगा । यहाँ अब दुःख भी नहीं रहता । ये अच्छा है या बुरा ? बुरा ही होगा । दुःख के रहने से कम से कम किसी का होना तो होता है । फिर दुःख अकेला भी तो नहीं आता , साथ में कुछ लोग या कारण ले आता है । अकेलापन तो कारण भी नहीं ला पाता अपने साथ ।
अकेले रहना कोई आदत होती है क्या ? अच्छी या बुरी ? मुझे तो लगता है ये कोई बीमारी होती है । पर बीमारी का भी तो कारण होता है ना । जब मैं पहली बार मरा था , तब मुझे मालूम था कि मेरा दिल बीमार है और उसी ने मुझे धोखा दिया था । दूसरी बार , मुझे मेरे फेफड़ों ने मारा था । उसके बाद जब भी किसी बीमारी से मरा , तो कारण मालूम था । बिना बीमारी के भी मरा , तब भी कारण मालूम था ।
मौत का भी कारण होता है । अकेलेपन का कोई कारण नहीं होता । अकेलापन बस होता है । उसका होना ही इस बात की गवाही देता है कि इस दुनिया में सब कुछ बिना कारण के ही है । आप भी ।
अब मैं अपने दिमाग से निकल कर दुनिया में वापस आ चुका हूँ । अब कोई मुझसे बस ये ना पूछे कि आपके लिये किसी बात का कोई मायना क्यों नहीं है । मैं शून्यवाद में जीते हुए भी कारण तलाशने चला जाता हूँ । वो शून्यवाद , जिसके साथ मेरा रिश्ता सार्वजनिक है । और फिर वो औरतें जिनके साथ मेरे रिश्ते को हम दोनों के अलावा कोई नहीं जानता , वो मुझसे उस रिश्ते में वफ़ा की उम्मीद रखती हैं । मेरे किसी से वफ़ादार ना होने का कारण भी मुझे नहीं पता । मुझे बस ये पता है कि मैं इसका कारण जानने को दुबारा अपने दिमाग के घर में पाँव नहीं रखूँगा ।
' अकेलापन वफ़ादारी नहीं होने से आता है । एक दिन मेरा दिमाग मुझे ये खुद बताने चल कर मेरे घर आयेगा । तब तक मैं यूँ ही अकेलेपन में अपने आप को सही मान कर ऐसे ही बातें बनाता रहूँगा ।
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Writing ✍️ By : Saurav Meena ( Nicki - Hazel )
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