फिर मैंने नज़र घुमाई और पाया कि मैं लोगों को उनके खुशी में भी याद आता हूँ । वो अपने जश्न में मुझे शामिल करना चाहते हैं । कुछ लोग मुझे बहाने से भी अपने जीवन में शामिल करते रहते हैं । उन्हें कोई वजह नहीं चाहिए होती । कुछ लोगों की ज़िंदगी में मैं लत की तरह भी बस जाता हूँ और फिर उनसे मुझसे दूर नहीं रहा जाता ।
ये सब देखते - देखते मैंने महसूस किया कि मैं जब भी किसी के सामने खुलता हूँ , तो मैं बहुत ज़्यादा देर उनके साथ रह नहीं पाता । मेरे वजूद का हर हिस्सा हर शख़्स संभाल नहीं पाता , और सब मुझे थोड़ा थोड़ा अपनी जरूरत के हिसाब से अपने अंदर ले कर चले जाते हैं । मैं किसी के अंदर पूरा नहीं समा पाता । कई बार मेरे अंदर की ख़लिश मेरे बाहर मौजूद इंसान को उसके अपने अंदर की ख़लिश से मिलवा देती है । शायद इसलिए ये खुद से भागते हुए लोग , मुझे ज़्यादा देर झेल नहीं पाते ।
मैं कौन हूँ ? नहीं , मैं कोई लेखक नहीं हूँ जो ये बातें कह रहा है । मैं लेखक के अंदर जो शराब गई है , उसकी बोतल हूँ । मेरे वजूद का इतना सच , तुम्हारे वजूद का भी सच है ।
तुम सब सिर्फ़ बियर नहीं , हर शराब की बोतल हो ।
तुम्हारा सच भी इतना है कि तुम्हें लोग अपने दुःख , सुख , मर्ज़ी आदत के हिसाब से या कई बार यूँ ही बेवजह अपने पास ले आते हैं । तुम सोचते हो इसने बुरा किया , उसने अच्छा किया , उसने मुझे छोड़ दिया , उसने मेरा साथ दिया । जो तुम नहीं समझना चाहते वो ये है कि सामने वाला हमेशा शराब की पूरी बोतल नहीं ख़त्म कर सकता । सब की अपनी - अपनी क्षमता होती है । कई लोगों को बहुत सारी शराब मिला कर पीने की आदत भी होती है । कई लोग शराब पी कर उल्टियाँ करते भी पाए जाते हैं , और कई निश्चिन्त हो कर चुपचाप सो जाते हैं । इनमें से कुछ भी करने वाला इंसान सही है या गलत ये आप खुद तय कर लीजिए |
मेरे अंदर आखिरी घूंट बाकी है जो ख़त्म होते ही मेरा वजूद मिट जाएगा । चूंकि आज मैं एक लेखक के अंदर खाली हो रहा था तो मैंने सोचा कि जाने के पहले अपना मन कह दूं । इसीलिए मैंने लेखक को भी ये कहा है कि " आज गाड़ी तेरा भाई चलायेगा । "
Writing ✍️ By : Saurav Meena ( Nicki - Hazel )
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