Writing ✍️ By : Saurav Meena ( Nicki - Hazel )
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कैसे कह दूँ, मेरा प्यार वेस्ट हो गया.. जब जब अपना दर्द लिखा.. कॉपी-पेस्ट हो गया..!!😂🤣😋😎 How can I say, my love became West. When I wrote my pain .. Copy-paste done .. !!
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कल रात फिर मैं उसके घर में घुस गया । उसे मेरा ऐसे चले आना बिल्कुल पसंद नहीं था । फिर किसी को क्यों ही पसंद आयेगा कि कभी भी बिना बताये कोई चला आये और आकर भीतर उथल - पुथल मचा दे । मैंने फिर से वही किया । हर कमरे में जा कर जासूसों की भाँति सब कुछ जाँचा परखा । मुझे कहीं भी किसी के होने का कोई निशान नहीं मिल रहा था । मैं अपनी नाकामी से परेशान हो कर सब कुछ उलट - पलट कर देखने लगा । कुछ तोड़ कर देखा , कुछ चीर कर । हर जगह मुझे बस मायूसी हाथ लगी । हताशा से भरा हुआ मैं , ये तय कर चुका था कि अब मुझे यहाँ नहीं आना ।
मुझे ये पता था कि मेरा मन खाली है । आज मुझे समझ आया कि अब मेरा दिमाग भी खाली हो चुका है । अब यहाँ भी कोई नहीं रहता । ना कोई आता - जाता है । मैं कितना भी ढूँढ लूँ , मुझे अब किसी का अस्तित्व नहीं मिलेगा । यहाँ अब दुःख भी नहीं रहता । ये अच्छा है या बुरा ? बुरा ही होगा । दुःख के रहने से कम से कम किसी का होना तो होता है । फिर दुःख अकेला भी तो नहीं आता , साथ में कुछ लोग या कारण ले आता है । अकेलापन तो कारण भी नहीं ला पाता अपने साथ ।
अकेले रहना कोई आदत होती है क्या ? अच्छी या बुरी ? मुझे तो लगता है ये कोई बीमारी होती है । पर बीमारी का भी तो कारण होता है ना । जब मैं पहली बार मरा था , तब मुझे मालूम था कि मेरा दिल बीमार है और उसी ने मुझे धोखा दिया था । दूसरी बार , मुझे मेरे फेफड़ों ने मारा था । उसके बाद जब भी किसी बीमारी से मरा , तो कारण मालूम था । बिना बीमारी के भी मरा , तब भी कारण मालूम था ।
मौत का भी कारण होता है । अकेलेपन का कोई कारण नहीं होता । अकेलापन बस होता है । उसका होना ही इस बात की गवाही देता है कि इस दुनिया में सब कुछ बिना कारण के ही है । आप भी ।
अब मैं अपने दिमाग से निकल कर दुनिया में वापस आ चुका हूँ । अब कोई मुझसे बस ये ना पूछे कि आपके लिये किसी बात का कोई मायना क्यों नहीं है । मैं शून्यवाद में जीते हुए भी कारण तलाशने चला जाता हूँ । वो शून्यवाद , जिसके साथ मेरा रिश्ता सार्वजनिक है । और फिर वो औरतें जिनके साथ मेरे रिश्ते को हम दोनों के अलावा कोई नहीं जानता , वो मुझसे उस रिश्ते में वफ़ा की उम्मीद रखती हैं । मेरे किसी से वफ़ादार ना होने का कारण भी मुझे नहीं पता । मुझे बस ये पता है कि मैं इसका कारण जानने को दुबारा अपने दिमाग के घर में पाँव नहीं रखूँगा ।
' अकेलापन वफ़ादारी नहीं होने से आता है । एक दिन मेरा दिमाग मुझे ये खुद बताने चल कर मेरे घर आयेगा । तब तक मैं यूँ ही अकेलेपन में अपने आप को सही मान कर ऐसे ही बातें बनाता रहूँगा ।
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Writing ✍️ By : Saurav Meena ( Nicki - Hazel )
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इसी दरवाज़े से एक दिन उसको आना था,
मैं टकटकी लगाये देखता रहा,
इंतज़ार आसान रहा,
मैं मुश्किल होता गया,
चौखट को छूने वाली हवा,
अपनी आहट यहाँ छोड़ कर चली गयी,
दुबारा कभी ना आने को,
गुज़रते वक़्त के साथ,
ये दरवाज़ा मेरे अंदर के दीमक को खाने लगा,
मेरी भावनाओं ने छोड़ दिया,
दरवाज़े की तरफ देखना,
मगर मैं निरंतर इस दरवाज़े को देखता रहा,
एक दिन, मैं भी काठ का दरवाजा हो गया,
उसी काठ के दरवाजे से,
एक दिन मौत आयी,
मेरा दरवाज़ा हो जाना,
मेरी नियति थी,
उसका मेरी मौत बन जाना,
उसकी नियति थी,
नियति की नियति यही है,
वो कभी दरवाज़े से नहीं आती,
दरवाज़े की नियति है,
कि उससे कुछ नहीं आता,
उससे बस टूटी हुई उम्मीद,
बाहर जाती है।
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Writing ✍️ By : Saurav Meena ( Nicki - Hazel )
फिर मैंने नज़र घुमाई और पाया कि मैं लोगों को उनके खुशी में भी याद आता हूँ । वो अपने जश्न में मुझे शामिल करना चाहते हैं । कुछ लोग मुझे बहाने से भी अपने जीवन में शामिल करते रहते हैं । उन्हें कोई वजह नहीं चाहिए होती । कुछ लोगों की ज़िंदगी में मैं लत की तरह भी बस जाता हूँ और फिर उनसे मुझसे दूर नहीं रहा जाता ।
ये सब देखते - देखते मैंने महसूस किया कि मैं जब भी किसी के सामने खुलता हूँ , तो मैं बहुत ज़्यादा देर उनके साथ रह नहीं पाता । मेरे वजूद का हर हिस्सा हर शख़्स संभाल नहीं पाता , और सब मुझे थोड़ा थोड़ा अपनी जरूरत के हिसाब से अपने अंदर ले कर चले जाते हैं । मैं किसी के अंदर पूरा नहीं समा पाता । कई बार मेरे अंदर की ख़लिश मेरे बाहर मौजूद इंसान को उसके अपने अंदर की ख़लिश से मिलवा देती है । शायद इसलिए ये खुद से भागते हुए लोग , मुझे ज़्यादा देर झेल नहीं पाते ।
मैं कौन हूँ ? नहीं , मैं कोई लेखक नहीं हूँ जो ये बातें कह रहा है । मैं लेखक के अंदर जो शराब गई है , उसकी बोतल हूँ । मेरे वजूद का इतना सच , तुम्हारे वजूद का भी सच है ।
तुम सब सिर्फ़ बियर नहीं , हर शराब की बोतल हो ।
तुम्हारा सच भी इतना है कि तुम्हें लोग अपने दुःख , सुख , मर्ज़ी आदत के हिसाब से या कई बार यूँ ही बेवजह अपने पास ले आते हैं । तुम सोचते हो इसने बुरा किया , उसने अच्छा किया , उसने मुझे छोड़ दिया , उसने मेरा साथ दिया । जो तुम नहीं समझना चाहते वो ये है कि सामने वाला हमेशा शराब की पूरी बोतल नहीं ख़त्म कर सकता । सब की अपनी - अपनी क्षमता होती है । कई लोगों को बहुत सारी शराब मिला कर पीने की आदत भी होती है । कई लोग शराब पी कर उल्टियाँ करते भी पाए जाते हैं , और कई निश्चिन्त हो कर चुपचाप सो जाते हैं । इनमें से कुछ भी करने वाला इंसान सही है या गलत ये आप खुद तय कर लीजिए |
मेरे अंदर आखिरी घूंट बाकी है जो ख़त्म होते ही मेरा वजूद मिट जाएगा । चूंकि आज मैं एक लेखक के अंदर खाली हो रहा था तो मैंने सोचा कि जाने के पहले अपना मन कह दूं । इसीलिए मैंने लेखक को भी ये कहा है कि " आज गाड़ी तेरा भाई चलायेगा । "
Writing ✍️ By : Saurav Meena ( Nicki - Hazel )
हम कौन लोग हैं?
हम कौन लोग हैं?
हम कौन लोग हैं?
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She asked me, "What has been your biggest fear throughout your life?" I sat there. Quietly. Normally, your silence hits others, bu...