घर का होना ज़रूरी है । ताकि आप वापस जा सकें । घर सब को चाहिये होता है । घर एक उम्मीद होता है कि कोई ठिकाना है जहाँ आप वापस जा सकते हैं । कोई है जो आपके इंतज़ार में है । मन की फितरत में होता है भटकना । कहीं भी चला जाता है मन । मन का भी एक घर होना चाहिये । जहाँ मन वापस जा सके । मेरे मन को मैंने भटकने के लिये छोड़ दिया था , क्योंकि उसके पास घर नहीं था ।
अब तुम हो , तो ये बार - बार वहीं लौट कर जाना चाहता है ।
तुम मेरे मन का घर हो । तुम्हारा होना ज़रूरी है ।
हर बार जब मैं इस पेटिंग को देखता हूँ तो मुझे लगता है कि ये और बेहतर हो सकती थी । इसमें मौजूद जो नाव है उसके आगे नदी का पानी और नीला हो सकता था । नदी से लगा हुआ पहाड़ और हरा हो सकता था । पहाड़ के पीछे ढलता हुआ सूरज और लाल हो सकता था । नाविक के कपड़े और सफेद हो सकते थे । पूरी तस्वीर में और रंग भरा जा सकता था । ये तस्वीर मेरी जिंदगी की तरह है । मुझे लगता है इसमें और रंग भरा जा सकता है ।मुझे ऐसा इसलिये लगता है क्योंकि मेरे अंदर उम्मीद है कि चीजें बेहतर हो सकती हैं । और उन चीज़ों के बेहतर होने की उम्मीद इसलिये है क्योंकि मुझे लगता है तुम्हारे होने से सब कुछ , हर रोज़ , हर पल , बेहतर हो सकता है । मैं यूँ ही तस्वीरें बेहतर बना सकूँ इसके लिये तुम्हारा होना ज़रूरी है । मेरीज़िंदगी के रंगीन होने के लिये तुम्हारा होना ज़रूरी है ।
तुम मेरी उम्मीद हो , और मेरी उम्मीद के बने रहने के लिये तुम्हारा होना ज़रूरी है ।
रिश्तों के उतार - चढ़ाव में दिल के अंदर एक टीस दबी होती है । ऐसी टीस जिसमें इंसान हर बार खुद पर तरस खाने लगता है । उसे लगता है कि उसके साथ सब कुछ गलत होता है । हम इंसान खुद को हमेशा सताया हुआ ही समझते हैं चाहे हमने ही क्यों ना दुनिया का जीना मुहाल कर रखा हो । इससे हमें आईने के सामने इज़्ज़त से खड़े रहने की ताकत मिलती है । मुझे रिश्तों और लोगों के बदलने से खुद को फ़र्क नहीं पड़ने देना । मुझे खुद पर तरस खाना नहीं आना । मुझे आईने के सामने झूठी सच्चाई नहीं दिखानी । मुझे कोई टीस नहीं चाहिये । मुझे मेरी जिंदगी के झूठे सच से बचाने को तुम्हारा होना ज़रूरी है । मुझे ये समझाने के लिये कि हर रिश्ता ख़त्म नहीं होता , तुम्हारा होना ज़रूरी है । मेरे मन में कोई टीस ना उठे , इसके लिये तुम्हारा होना ज़रूरी है ।
तुम मेरा भरोसा हो , और मेरे भरोसे के बने रहने के लिए तुम्हारा होना ज़रूरी है ।
तुम्हें फ़ोन कर के तुमसे बात करना मेरी मजबूरी हैं । मैं यूँ ही फ़ोन किसी और के हाथ में नही दे सकता । मैं फिर आज की रात दुःख में नहीं गुज़ार सकता था । तुम्हारी आवाज़ सुनने के बाद तुम्हारी आवाज़ नहीं सुनने का मन हो ही नहीं सकता । बहुत मुश्किल से तुम्हारी आवाज़ सुने बिना जीने की आदत डाल रहा हों । अब इसे ऐसे ही रहने दो । और तुमने भी जितनी आसानी से पूछ लिया ना कि कौन बोल रहा है , जैसे तुम्हें मेरा नंबर याद नहीं , वो काबिल - ए - तारीफ़ था । हम बिना बात किये भी एक - दूसरे को जितना समझ लेते हैं , उतना शायद कोई बात कर के समझ नहीं सकता । दुनिया के लिये हम दोस्त थे । दुनिया के लिये हम दोस्त हैं । हमारी दुनिया अलग थी । हमारी दुनिया में हम दोस्त नहीं थे । हमारी दुनिया प्रेम की दुनिया थी ।प्रेम की दुनिया में सिर्फ प्रेमी होते हैं । इस प्रेम की दुनिया के बने रहने के लिये तुम्हारा होना ज़रूरी है । प्रेमियों की दुनिया में बने रहने के लिये तुम्हारा होना ज़रूरी है ।
तुम मेरा प्रेम हो और मैं ये प्रेम जीता रहूँ , इसलिये तुम्हारा होना ज़रूरी है ।
पहले मुझे लगता था तुम एक ख़त हो , जिसे मैं रोज़ पढ़ता रहूँगा और एक दिन मेरा जी भर जायेगा । फिर मैं किसी और ख़त का इंतज़ार करने लगूंगा। मगर , तुम्हें पढ़ते - पढ़ते मैंने ये जाना कि तुम एक ग्रंथ हो , जिसे हर रोज़ पढ़ना मेरी ज़रूरत है । मेरे हर दिन की शुरुआत और अंत तुमसे ही है ।लोगों के लिये जैसे उनकी धार्मिक किताबें होती हैं , जिसमें उन्हें उनका खुदा मिल जाया करता है , वैसे ही तुम में मैंने अपना खुदा पाया है । तुम तो जानती ही कि मैं नास्तिक हूँ , मगर अब ये इश्क़ मेरा मजहब है और तुम मेरी खुदा । हमें खुदा की ज़रूरत सिर्फ इसलिये नहीं होती कि हमें ज़िन्दगी का मकसद मिल सके । हमें खुदा की ज़रूरत इसलिये होती है , ताकि हमारी दुनिया सलामत रहे । ये मेरा तुम्हारे लिए इश्क़ , इबादत कब बन गया मुझे नहीं मालूम । मुझे सिर्फ इतना मालूम है कि अब तुम ही हो जिसे पढ़ते रहने से मेरी दुनिया सलामत रहेगी ।
तुम मेरी खुदा हो , और मेरी दुनिया की सलामती के लिये तुम्हारा होना ज़रूरी है ।
मैं कभी इत्तेफ़ाक़ में यकीन नहीं रखता था , मगर तुम मेरी ज़िंदगी का सबसे खूबसूरत इत्तेफ़ाक़ हो । मैं अब भी इत्तेफ़ाक़ में यकीन नहीं रखता । तुम इत्तेफ़ाक़ नहीं हो । तुम्हें हादसा भी नहीं कह सकता क्योंकि हादसे इतने खूबसूरत नहीं होते । तुम्हें हकीकत भी नहीं कह सकता क्योंकि हकीकत तो हमेशा ही बुरी होती है । फिर तुम क्या हो ? शायद , तुम यकीन हो कि इत्तेफ़ाक़ होते हैं , या फिर शायद वो हादसा जो यकीन दिला दे कि हकीकत भी खूबसूरत हो सकती है ।
तुम जो भी हो , तुम्हारे होने से इन सब बातों में मुझे यकीन होने लगा है ।
तुम मेरा यकीन हो , और मेरा यकीन बना रहे इसलिये तुम्हारा होना ज़रूरी है ।
Writing ✍️ By : Saurav Meena ( Nicki - Hazel )
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True feelings😌😌
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